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तमिलनाडु में भाषायी विवाद पर बोले गवर्नर- झूठ बोलकर उकसाना नहीं चाहिए

तमिलनाडु में भाषायी विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। अब राज्यपाल एन रवि ने कहा है कि 'देश के अंदर और बाहर ऐसी ताकतें हैं जो कि भारत के आगे बढ़ने से खुश नहीं हैं।

tamilnadu governor rn ravi । Photo Credit: PTI

तमिलनाडु के गवर्नर आरएन रवि । Photo Credit: PTI

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तमिलनाडु में भाषा को लेकर शुरू हुआ विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। शुक्रवार को तमिल संत अय्या वैकुंदर के सम्मान में आयोजित एक कार्यक्रम में भाषण देते हुए तमिलनाडु के राज्यपाल आर एन रवि ने राज्य के भीतर चल रहे 'भाषायी युद्ध' को लेकर सावधान किया।

 

उन्होंने कहा, 'सख्ती के साथ द्विभाषा सिद्धांत के पालन की वजह से दक्षिण के युवा तमाम तरह के अवसरों से वंचित हो जाएंगे, जो कि उचित नहीं है।' हालांकि, सत्ताधारी डीएमके ने राज्यपाल के ऊपर तमिलनाडु में 'नफरत फैलाने' का आरोप लगाया।

 

 

 

द्वि-भाषा सिद्धांत की आलोचना की

उनका स्पीच मूल रूप से सनातन धर्म पर आधारित था इसके अलावा तमिलनाडु में लंबे समय से चल रहे द्वि-भाषा नीति की तीखी आलोचना की।

 

राज्यपाल रवि ने कहा, 'भारत और सनातन धर्म को अलग अलग नहीं बांटा जा सकता। अगर सनातन धर्म को कोई खतरा है, तो इसका मतलब है कि भारत को भी खतरा है।' 

 

हालांकि, उनका भाषण धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को लेकर था लेकिन यह राजनीतिक हो गया।

 

स्टालिन ने दिया था बयान

उनकी टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब मुख्यमंत्री एम के स्टालिन के नेतृत्व वाली राज्य की द्रविड़ मुनेत्र कड़गम सरकार राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत हिंदी को कथित रूप से थोपने को लेकर केंद्र में भारतीय जनता पार्टी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के साथ टकराहट है।

 

उन्होंने कहा, 'देश के अंदर और बाहर ऐसी ताकतें हैं जो कि भारत के आगे बढ़ने से खुश नहीं हैं। यह ताकतें देश को जातीय और भाषायी आधार पर बांटना चाहती हैं।' ब्रिटिश राज से उनकी तुलना करते हुए उन्होंने कहा, 'वे लोगों में बंटवारा करना चाहती हैं। यह सनातन विरोधी ताकतें हैं, लेकिन वे यह नहीं जानतीं कि सनातन शाश्वत है।'

 

‘झूठ बोलकर उकसाना नहीं चाहिए’

उन्होंने कहा, 'भारत में लोग भाषा चुनने के लिए स्वतंत्र हैं। दुर्भाग्य से, हमारे राज्य में लोग स्वतंत्र नहीं हैं,’ हमें समस्याएं पैदा नहीं करनी चाहिए और झूठ फैलाकर लोगों को उकसाना नहीं चाहिए। कोई युद्ध नहीं है। कोई थोपा नहीं जा रहा है। लेकिन लोगों को अपनी पसंद की भाषा चुनने की आज़ादी होनी चाहिए।'

 

राजभवन की ओर से शुक्रवार को जारी एक बयान में राज्य की द्वि-भाषा नीति को 'कठोर' बताया गया। बयान में दावा किया गया कि तमिलनाडु के छात्र पड़ोसी राज्यों के अपने साथियों की तुलना में अवसरों से 'काफी वंचित' महसूस करते हैं।

 

भाषाएं सीखने का विकल्प होना चाहिए

सोशल मीडिया पर राजभवन की पोस्ट में राज्यपाल और दक्षिणी तमिलनाडु के नेताओं, उद्यमियों और छात्रों के बीच बातचीत का हवाला दिया गया है। बयान में कहा गया है, 'उन्हें लगता है कि दुर्भाग्य से हिंदी के विरोध के नाम पर उन्हें अन्य दक्षिण भारतीय भाषाएं भी नहीं पढ़ने दी जा रही हैं। यह वाकई अनुचित है। हमारे युवाओं को भाषाएं सीखने का विकल्प मिलना चाहिए।'


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