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बागानों से आपकी प्याली तक, चाय के एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट की पूरी कहानी

भारत में हर साल करोड़ों किलो से ज्यादा चाय का उत्पादन होता है फिर भी भारत चाय के सबसे बड़े आयातकों में से एक है। ऐसा क्यों है, विस्तार से जानते हैं।

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चाय के बागान में पत्तियां तोड़ती महिलाएं। (Photo Credit: PTI)

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भारत देश के सबसे बड़े निर्यातकों में से एक है। सबसे ज्यादा चाय उत्पादक देशों की लिस्ट में भारत दूसरे पायदान पर है। चीन दुनिया में करीब 374 हजार मीट्रिक टन चाय बेचता है, वहीं भारत हर साल 588.61 मिलियन किलो चाय उत्पादित करता है। आसान भाषा में भारत हर साल 64 करोड़ किलोग्राम से ज्यादा चाय की उत्पादन होता है फिर भी भारत हर साल विदेश से 493 करोड़ रुपये की चाय आयात करता है। 

भारत में हर साल इतने बड़े पैमाने पर चाय का उत्पादन होता है फिर भी बड़ी संख्या में चाय आयात की जाती है। भारत चीन, वियतनाम और श्रीलंका से चाय खरीदता है। इसके अलावा अमेरिका जैसे देशों से भी अब भारत चाय की अलग-अलग किस्में आयात कर रहा है। यह परंपरागत चाय से अलग है। 

भारत किस तरह की चाय बेचता है?
भारत में मुख्य तौर पर सीटीसी और पंरपरागत चाय का आयात और निर्यात होता है। सीटीसी चाय, 'क्रश, टियर और कर्ल' मेथड से बनता है। चाय की पत्तियों को पहले इकट्ठा करते हैं, इन्हें मशीन के जरिए प्योर करते हैं, उनकी मिक्सिंग होती है, उन्हें छोटा आकार दिया जाता है। उन्हें छोटो-छोटे गेंद की तरह तोड़ा-मरोड़ा जाता है। यह चाय बनाने में आसान होती है और आमतौर पर हमारे-आपके घरों में खूब इस्तेमाल होती है। 

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पारंपरिक चाय क्या है?
पारंपरिक चाय को उत्पादन के सबसे पुराने तरीके से तैयार किया जाता है। इसे आप अपने हाथों से तैयार कर सकते हैं। चाय की पत्तियों को इस प्रक्रिया में तोड़ा जाता है, उन्हें इकट्ठा किया जाता है, सुखाया जाता है, उनकी रोलिंग भी हाथों और कुछ आसान मशीनों के जरिए की जाती है। इस चाय का स्वाद, सीटीसी चाय की तुलना में अलग होता है। इसमें ज्यादा संसाधन खर्च होते हैं। कंपनियों को इसे तैयार करने के लिए ज्यादा पैसे खर्च करने पड़ते हैं। 

चाय के बागान। (Photo Credit: PTI)

भारत ने किस साल कितनी बेची चाय?
साल 2020 में भारत ने 508.42 मिलियन किलोग्राम सीटीची चाय बेची है। पंरपरागत चाय 51.54 मिलियन किलोग्राम बेची है। 2021 में 572.57 मिलियन किलोग्राम CTC चाय का भारत ने निर्यात किया था, वहीं 59.37 मिलियन किलोग्राम चाय परंपरागत बिकी थी। 2022 में CTC चाय का निर्यात 521.33 मिलियन किलोग्राम था, वहीं परंपरागत चाय का आंकड़ा 67.81 मिलियन किलोग्राम था। 2023 में 520.92 मिलियन किलोग्राम और 2024 मिलियन किलोग्राम CTC चाय भारत ने बेची, वहीं परंपरागत चाय के आंकड़े क्रमश: 66.39 मिलियन किलोग्राम और 52.85 मिलियन किलोग्राम रहे। 

 

साल CTC चाय (KG में) पारंपरिक चाय (KG में)
2020 50.84 करोड़ 5.15 करोड़
2021 57.26 करोड़ 5.94 करोड़
2022 52.13 करोड़ 6.78 करोड़
2023 52.09 करोड़

6.64 करोड़

2024 52.40 करोड़

5.29 करोड़

 

AI Generated Image. Photo Credit: Meta AI

साल 2019 से 24 तक, भारत ने कब, कितनी खरीदी चाय?
साल 2019 से 2020 के बीच देश में 1.54 मिलियन किलोग्राम चाय आयात की गई। आयात पर कुल 32.66 मिलियन अमेरिकी डॉलर खर्च हुए। भारतीय आंकड़े में यह रकम करीब 279.668 करोड़ रुपये के आसपास है। 2020-21 में 27.75 मिलियन किलोग्राम चाय खरीदी गई, जिसके लिए देश को 62.54 मिलियन अमेरिकी डॉलर चुकाने पड़े। तब देश ने करीब  462.80 करोड़ रुपये की चाय आयात की थी। 2021-22 में भारत ने 25.97 मिलियन किलोग्राम चाय खरीदी, जिसकी कीमत  514.79103 करोड़ रुपये अदा की। 2022-23 में 29.98 मिलियन किलोग्राम चाय खरीदी गई, जिसके लिए 60 मिलियन अमेरिकी डॉलर चुकाने पड़े। भारतीय रुपये में यह आंकड़ा 514.02 करोड़ रुपये के आसपास है। 2023-24 में 25.21 मिलियन किलोग्राम चाय खरीदी गई, जिसके एवज में 456.62 करोड़ चुकाने पड़े। यह आंकड़े टी बोर्ड के हैं। 

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चाय के बागान। (Photo Credit: PTI)

भारत दुनिया को कितना बेच पाता है चाय?
भारत की आबादी करीब 140 करोड़ है। वैश्विक खपत में भारत की हिस्सेदारी करीब 19 प्रतिशत है। देश के कुल उत्पादन का 81 प्रतिशत देश के भीतर ही खत्म हो जाता है। दुनिया भारत से ज्यादा चाय इसलिए बेच पाती है क्योंकि वहां चाय की खपत कम है। केन्या और श्रीलंका में चाय का उत्पादन ज्यादा है लेकिन खपत कम है। यही वजह है कि चीन वैश्विक आंकड़ों का 49.64 फीसदी चाय अकेले उत्पादित करता है और 19.90 प्रतिशत चाय बेच देता है। भारत में दुनिया का 20 फीसदी चाय पैदा होता है, जिसमें से 12.54 फीसदी चाय वैश्विक आंकड़ों की तुलना में भारत ही बेचता है। चीन में चाय का उत्पादन 3339.48 मिलियन किलोग्राम है, भारत करीब 367.54 किलोग्राम चाय उत्पादित करता है। 


भारत में कितने तरह की चाय तैयार होती है?
भारत में सबसे ज्यादा 'ब्लैक टी' का उत्पादन होता है। असम, दार्जिलिंग, नीलगिरी और केरल में इस तरह की चाय बड़े पैमाने पर तैयार की जाती है। देश में अपेक्षाकृत ग्रीन टी का उत्पादन कम होता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट तत्वों की मात्रा ज्यादा होती है। इन दिनों इस तरह के चाय की मांग तेजी से बढ़ी है। दार्जिलिंग, कांगड़ा वैली और अरुणाचल के कुछ हिस्सों में इसका उत्पादन होता है।

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खेतों से आपके घरों तक कैसे पहुंचती है चाय? 
चाय की खेती सामान्य तौर पर असम, दार्जिलिंग, नीलगिरि और केरल के कुछ हिस्सों में होती है। इसके पौधे का नाम कैमेलिया सिनेंसिस होता है। इनकी पत्तियों को मजदूर तोड़ते हैं, इनकी कलियों और पत्तियों को तोड़ा जाता है। एक साल में कई बार चाय की पत्तियां तोड़ी जाती हैं। चाय की पत्तियों की प्रॉसेसिंग फैक्ट्रियों में होती है। इनकी पत्तियों हवा में सुखाया जाता है, उन्हें रोल किया जाता है, ऑक्सिडेशन के लिए रखा जाता है, फिर से सुखाया जाता है। इस प्रक्रिया के बाद छंटाई और ग्रेडिंग भी होती है। इसके बाद चाय की पैकेजिंग होती है और चाय बेची जाती है। ब्लेंडिंग और ब्रांडिंग सबसे अंतिम प्रक्रिया है। इसके बाद चाय कंपनियां इन्हें खरीदती हैं, आपके घरों तक इसे पहुंचाती हैं।

चाय के बागान। (Photo Credit: PTI)

उत्पादन में नंबर 2 फिर भी विदेश से चाय क्यों खरीदता है भारत?
भारत में चाय की खपत सबसे ज्यादा है। भारत रूस, ईरान, अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और चीन जैसे देशों से चाय खरीदता है। बदलती जीवनशैली में स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को ग्रीन और ओलॉन्ग टी पीने की सलाह देते हैं। इसका स्वाद कड़वा होता है। इसका उत्पादन भारत में कम होता है। भारत नेपाल, केन्या, अमेरिका, वियतनाम और ईरान जैसे देशों से इस तरह की चाय खरीदता है। इन्हें प्रीमियम चाय की कैटेगरी में रखा गया है। अब फ्लेवर्ड चाय की मांग बढ़ी है। भारत जिस तरह की चाय खरीदता है, उनमें ज्यादातर फिटनेस और हेल्थ से जुड़े प्रोडक्ट हैं। इस तरह के उत्पादों के साथ दावा किया जाता है कि यह वजन घटाने में, कोलेस्ट्रॉल कम करने में मददगार होते हैं। भारत में बुक बॉन्ड, टैटली, लिप्टन, टेटली, ट्विनिंग्स, डिलमह टी, टी पिग्स, डिलमाह जैसे ब्रॉन्ड लोकप्रिय हो रहे हैं। 

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चाय के बागान। (Photo Credit: PTI)

चीन से चलकर भारत तक कैसे पहुंची चाय? यह है हतिहास
कहते हैं कि चाय की खोज 2737 ईसा पूर्व चीन में हुई थी। किवदंति है कि सम्राट शेन नुंग अपने लिए पानी गर्म करा रहे थे, तभी गलती से कुछ चाय की पत्तियां उसमें गिर गईं। उन्हें लगा कि यह कोई नई खुशबूदार चीज तैयार हो गई है, जिसे उन्होंने पिया तो स्वाद ठीक लगा। बौद्ध भिक्षुओं और चीनी यात्रियों के जरिए चाय पूरी दुनिया में फैली। भारत चाय से बहुत अनजान नहीं रहा है। आयुर्वेद में तुलसी, गिलोय और कहवा का जिक्र मिलता है। द एंपायर ऑफ टी: रिमार्केबल हिस्ट्री ऑफ द प्लांट दैट टूक ओवर द वर्ल्ड, फॉर ऑल द टी इन चाइना: हाउ इंग्लैंड स्टोल द वर्ल्ड्स फेवरिट ड्रिंक एंड चेंज्ड हिस्ट्री,  अ हिस्ट्री ऑफ द टी इंडस्ट्री इन इंडिया जैसी किताबों में चीन से निकलने और दुनिया तक पहुंचने का जिक्र है। इन किताबों में एक किस्सा यह भी है कि 12वीं से 13वीं शताब्दी में बौद्ध भिक्षु इसे लेकर भारत आए थे लेकिन यह बहुत प्रमाणिक नहीं है।

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